misirpuran

नजरिया कुछ खास है

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shashiranjanmishra


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कबीरा कुतिया राम का, हम भी हैं आवाम का

Posted On: 16 Jun, 2010  
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बीड़ी: भारतीयता का प्रतिक !!!

Posted On: 13 Jun, 2010  
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मस्ती मालगाड़ी में

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महामृत्युंजय मंत्र का तार्किक अर्थ

Posted On: 25 Apr, 2010  
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महामृत्युंजय मंत्र का तार्किक अर्थ

Posted On: 25 Apr, 2010  
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Hello world!

Posted On: 20 Apr, 2010  
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ भावार्थ:- हम भगवान शंकर की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो प्रत्येक श्वांस में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं। उनसे हमारी प्रार्थना है कि वे हमें मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर दें, जिससे मोक्ष की प्राप्ति हो जावे। जिस प्रकार एक ककड़ी बेल में पक जाने के बाद उस बेल रुपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है उसी प्रकार हम भी इस संसार रुपी बेल में पक जाने के बाद जन्म-मृत्यु के बंधनों से सदैव के लिए मुक्त हो जाएं और आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्याग कर आप में लीन हो जावें। मन्त्र लाभ:- यह मन्त्र जीवन प्रदान करता है (अकाल मृत्यु, दुर्घटना इत्यादि )। यह मन्त्र सर्प एवं बिच्छू के काटने पर भी अपना पूरा प्रभाव रखता है। इस मंत्र का महत्वपूर्ण लाभ है कठिन एवं असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त करना। यह मन्त्र हर बीमारी को भगाने का शस्त्र है।

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के द्वारा: aditi kailash aditi kailash




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